पटना के व्यंजन 

गंगा रेसिपी सीरीज़ में हम आपको उन व्यंजनों के बारे में बताते हैं जो गंगा किनारे बसे शहरों में प्रचलित हैं।

गंगा रेसिपी सीरीज़

गंगा रेसिपी सीरीज़ 

सदियों से गंगा नदी, पटना शहर के खान-पान, रहन- सहन और सभ्यता को प्रभावित करती आई है।

कालांतर में कई चीजें बदल जाती हैं। परंतु खान-पान पीढ़ी दर पीढ़ी एक से रहते हैं। 

आइए जानते हैं, पटना के उन व्यंजनों के बारे में।

लिट्टी चोखा 

पटना में आपका स्वागत ही बिहार के इस स्वादिष्ट व्यंजन के साथ होगा। घी में डूबी हुई लिट्टी और बैंगन का भरता, बिहार के स्वाद की एक अलग कहानी बताते हैं। 

चन्द्रकला 

चन्द्रकला पटना की वो पारंपरिक मिठाई है, जिसको खाने के बाद पटना के व्यंजनों की मिठास का पता चलता है। 

आम भाषा में दाल पीठि को मोमोस और डम्पलिंग का बिहारी वर्जन बताया जाता है। स्वादिष्ट होने के साथ साथ ये हेल्दी भी होता है। 

दाल पीठ 

मालपुआ का नाम सुनते ही मुंह में उसका स्वाद आने लगता है, हर त्यौहार और ख़ुशी के मौके पर पटना के हर घर में ये बनता है। 

मालपुआ 

ठेकुआ 

ठेकुआ जबरदस्त भूख का बढ़िया इलाज है।पटना का ये व्यंजन देसी बिस्किट कहलाता है। ऊपर से सख्त और अंदर से नरम, इसे खाने का मजा ही अलग है। 

कुछ ख़ास बात तो है गंगा के किनारे पर बसे पटना में, यहां एक सादी सी सब्जी को स्वादिष्ट मिठाई में बदल दिया जाता है। परवल की मिठाई पटना की फेमस मिठाइयों में से एक है। 

परवल की मिठाई 

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